उत्तराखंड से लेकर चंडीगढ़ तक आखिर क्यों जलाई कर्मचारियों ने प्रस्तावित सेवा नियमावली की प्रतियां, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान कर्मचारी संघ ने प्रस्तावित सेवा नियमावली का किया विरोध, प्रस्तावित सेवा नियमावली को बताया कर्मचारी विरोधी, आंदोलन की दी चेतावनी
देहरादून।
उत्तराखंड से लेकर चंडीगढ़ तक कर्मचारियों ने प्रस्तावित सेवा नियमावली की प्रतियां जलाईं। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान कर्मचारी संघ ने प्रस्तावित सेवा नियमावली का विरोध किया। प्रस्तावित सेवा नियमावली को कर्मचारी विरोधी बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी।
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान कर्मचारी संघ ने प्रस्तावित सेवा नियमावली का विरोध किया। प्रस्तावित सेवा नियमावली की प्रतियां जलाकर आक्रोश जताया। साफ किया कि यदि शासन, सरकार का यही कर्मचारी विरोधी रवैया जारी रहा, तो आंदोलन तय है।
संघ से जुड़े कर्मचारियों ने हर जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। सभी राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों ने कार्मिक विरोधी प्रस्तावित सेवा नियमावली का पुरजोर विरोध किया। हर जिला स्तर पर नियमावली की प्रतियां जलाई गईं। पदाधिकारियों ने प्रस्तावित सेवा नियमावली पर तत्काल रोक लगाने और सचिव को पद से हटाने की मांग की। तय हुआ कि यदि प्रस्तावित नियमावली वापस नहीं ली गई, तो सचिव कौशल विकास एवं सेवायोजन का विरोध जारी रहेगा।
कर्मचारियों ने सचिव हटाओ. विभाग बचाओ, सचिव हटाओ अस्तित्व बचाओ के नारे लगा कर विरोध जताया। संघ के प्रांतीय महामंत्री पंकज सनवाल ने कहा कि नियमावली में कर्मचारी हितों को प्रभावित करने वाले प्रावधान रखे गए हैं। इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़ में प्रशिक्षण को गए कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद जोशी और उनके अन्य साथियों ने प्रस्तावित सेवा नियमावली की प्रतियां जलाईं। विरोध जताने वालों में प्रान्तीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओपी उनियाल, जिलाध्यक्ष निश्चल जोशी, पीके जोशी, भावना पन्त, गिरिजा शकर वर्मा, अंजू बिष्ट, ललिता सुन्दरियाल, रेनू धर्मशक्तु, वर्षा भट्ट, पूनम आर्या, सर्वजीत मटेला, जाकिर हुसैन, जगत सिंह, शेखरानन्द पांडे मौजूद रहे।
