कांग्रेस ने लुटाई जमीनें, भाजपा बढ़ा रही रोजगार, भाजपा अध्यक्ष बोले, कांग्र्रेस नेता खुद कबूल रहे अपनी सरकार का घोटाला, इन्वेस्टमेंट बोर्ड के नाम सिर्फ 18 हेक्टेयर भूमि, 7 हजार बीघा का कांग्रेसी दावा झूठा l

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देहरादून।

भाजपा ने यूडीबीआई को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि विकास विरोधियों एवं भ्रष्टाचारियों को राज्य की तरक्की हजम नहीं हो रही है।
प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि धामी सरकार में यूआईडीबी भी राज्य की जीडीपी को दोगुना करने के लक्ष्य को लेकर तेजी से आगे बढ़ रही है। तय नियमावली के अनुसार बोर्ड जमीन हासिल कर रहा है और वर्तमान में अनुपयोगी जमीनों का निवेश और रोजगार सृजन की दृष्टि से आर्थिक प्रबंधन किया जाएगा। विपक्ष सिर्फ चुनावी लाभ के लिए झूठे, बेबुनियादी आरोप लगाकर जनता में भ्रम फैलाने की असफल कोशिश कर रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस को आईना दिखाया कि अपनी सरकारों में औद्योगिक विकास के नाम पर जमीनों की बंदरबांट और संसाधनों के लूट का लाइसेंस वे किस तरह खुलेआम देते नजर आते थे। लिहाजा अब जब प्रदेश में मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में संतुलित और तीव्र गति से विकास हो रहा है तो कांग्रेस के नेताओं को विश्वास नहीं हो रहा है कि ऐसा हो सकता है। यही वजह है कि उनकी दिमागी गड़बड़ और अपने कार्यकाल के भ्रष्टाचारी अनुभव, उन्हें नकारत्मक रवैया अपनाने पर मजबूर कर रही है। उन्होंने उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड की ओर से राज्य में किए जा रहे विकास कार्यों पर उठाए जा रहे सवालों पर कांग्रेस को आईंना दिखाते हुए उत्तराखंड के विकास का दुश्मन बताया। दरअसल लगातार पराजय के बाद कांग्रेस बौखलाई हुई है यही वजह है कि उन्हें राज्य में हो रहा विकास हजम नहीं हो रहा है।

उन्होंने कहा कि यूआईआईडीबी के नाम पर अभी सिर्फ 18 हेक्टेयर भूमि है। ऐसे में राज्य की सात हजार बीघा से अधिक भूमि निजी कंपनियों को देने की बात पूरी तरह गलत है। जबकि शीशे की तरह स्पष्ट है कि राज्य में रोजगार और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से यूआईआईडीबी का गठन किया गया था जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद को दुगना करने के लक्ष्य से काम कर रही है । आज बोर्ड के जरिए राज्य के संसाधनों का राज्य के विकास की दिशा में बेहतर इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसके लिए राज्य में पर्यटन, शिक्षा, कृषि, उद्यान के सेक्टर में बड़े स्तर पर निवेश हो, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी तरह केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य की अनुपयोगी भूमि का नियमों के तहत आर्थिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाना है।

दरअसल सब कुछ नियमानुकूल, पारदर्शी और नियोजित तरीके से किया जा रहा है, जिसके चलते बढ़ती विकास की रफ्तार और सम्भावित तरक्की को भी जनता अनुभव कर रही है। प्रदेश के सवा करोड़ लोगों का पीएम मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व वाली सरकार की इन नीतियों पर पूरा भरोसा है। जिसे वह बार बार लोकतांत्रिक तरीके से दर्ज भी कर चुकी है और आने वाले विधानसभा चुनाव में भी तस्वीर यही रहने वाली है। इसलिए अपने लिए 27 में स्कोप समाप्त होता देख कांग्रेस का हाजमा खराब हो गया है। उन्होंने आईना दिखाया कि आज कांग्रेस को राज्य में होने वाला निवेश खटक रहा है। यदि यही सोच एनडी तिवारी सरकार में भाजपा की रही होती, तो उत्तराखंड में सेलाकुईं, रोशनाबाद हरिद्वार, रुद्रपुर सिडकुल जैसे औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं होते। उद्योगों, निवेशकों को निवेश के लिए संसाधन उपलब्ध कराना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी होती हैं। देश में आईटी, डाटा सेंटर, सेमी कंडक्टर चिप इंडस्ट्री, ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री सेक्टर में दुनिया भर की दिग्गज कंपनियां निवेश को आ रही हैं। खुद कांग्रेस की तेलंगाना, कर्नाटक सरकारों में निवेश के लिए उद्योग लाए जा रहे होंगे। क्या ये उद्योग अपने साथ जमीन बाहर से लेकर आ रहे हैं। ज़बाब होगा नहीं, क्योंकि उन्हें निवेश को संसाधन वहां की कांग्रेस सरकारें ही उपलब्ध करा रही होगी। वहीं आरोप लगाया कि उत्तराखंड कांग्रेस की सोच बेहद सीमित और संकीर्ण हो चुकी है। सुझाव देते हुए कहा कि कांग्रेस को प्रदेश के विकास और सरकारी भूमि से जुड़े तथ्यों पर राजनीति करने के बजाय पहले अपने शासनकाल का रिकॉर्ड देखना चाहिए। सच यह है कि कांग्रेस का इतिहास उत्तराखंड और जनहित के मुद्दों पर विरोधाभासी रहा है। जिस कांग्रेस ने उत्तराखंड राज्य निर्माण का विरोध किया, वही आज प्रदेश में तेजी से हो रहे ढांचागत और आर्थिक विकास को देखकर बौखलाहट में निराधार आरोप लगा रही है। कहा कि अपने शासनकाल में बेशकीमती जमीनों की बंदरबांट करने वाले आज किस मुंह से सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस बताए कि आईटी पार्क देहरादून की जिस जमीन पर आईटी इंडस्ट्री विकसित होनी थी, उसे बिल्डरों को कौड़ियों के दाम पर किसने बेचा? सिटी पार्क लैंडयूज वाली जमीन का लैंड यूज बिना पैसा जमा कराए बदलकर राज्य को करोड़ों के राजस्व का नुकसान किसने पहुँचाया? वर्ष 2006 में सिडकुल के माध्यम से सुपरटेक और प्लेनेट इंफ्रा को कौड़ियों के भाव भूमि किसने दी और 2013 में देहरादून आईटी पार्क में जीटीएम बिल्डर को जमीन देकर सीएजी ऑडिट आपत्तियों का कारण कौन बना?

उन्होंने छरबा में एजुकेशन सिटी से कांग्रेस को दिक्कत को लेकर भी कहा कि वहां उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक हजार करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। जहां तीन हजार से अधिक छात्रों को उच्च शिक्षा का अवसर मिलेगा। रिसर्च पर काम होगा। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। स्वरोजगार के नए अवसर बनेंगे। पूरी तय प्रक्रिया के अनुसार यूपीईएस जैसी नामी संस्था का चयन किया गया है।

वहीं तंज किया कि कांग्रेस ने खुद कबूला की उसकी सरकार में हुई गड़बड़ी है। कांग्रेस नेताओं ने खुद कबूला की आईटी पार्क देहरादून में आईटी की जगह रियल स्टेट से जुड़ी सिक्का कंपनी को जमीन दी गई। कांग्रेस आरोप पत्र समिति के अध्यक्ष करन माहरा ने सिक्का बिल्डर को जमीन देने का जिक्र किया। इस बिल्डर को जमीन 2013 में कांग्रेस सरकार में दी गई। लिहाजा कांग्रेस नेताओं को सवाल भाजपा से नहीं, अपने नेताओं से पूछना चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि धामी सरकार की नीति पूरी तरह स्पष्ट और पारदर्शी है। उत्तराखंड की जमीन किसी को बेची नहीं जा रही है, बल्कि भूमि का मालिकाना हक पूरी तरह से राज्य सरकार के पास ही रहेगा। निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों के तहत केवल लीज मॉडल के माध्यम से निवेश को आकर्षित किया जा रहा है। कहा कि पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में यदि भूमि वर्षों तक अनुपयोगी पड़ी रहे तो उससे न रोजगार पैदा होता है और न ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है। यूआईआईडीबी के माध्यम से खाली पड़ी सरकारी जमीनों का सुनियोजित उपयोग कर पर्यटन, वेलनेस, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य और आतिथ्य क्षेत्र में निवेश लाया जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाजार मिलेगा। आज जब धामी सरकार राज्य का स्वामित्व बरकरार रखते हुए पर्यटन और वेलनेस क्षेत्र में रोजगार लाने के लिए लीज नीति अपना रही है, तो कांग्रेस के पेट में दर्द क्यों हो रहा है? प्रदेश की जागरूक जनता कांग्रेस के इस विकास विरोधी चेहरे को पूरी तरह पहचान चुकी है और उनके इस भ्रामक व नकारात्मक एजेंडे को कभी स्वीकार नहीं करेगी।

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