देहरादून।
नये साल पर कर्मचारियों ने काला दिवस मनाया। कर्मचारियों ने साफ किया कि उन्हें नई पेंशन स्कीम किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है। कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर आवाज की तेज की। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के बैनर तले कर्मचारियों ने प्रदेश भर के कार्यालयों में काली पट्टी व काला मास्क लगाकर विरोध जताया। सभी कर्मचारियों ने अपने सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीर काली रखी। शाम तीन बजे से लेकर छह बजे के बीच एनपीएस के विरोध में कर्मचारियों ने ट्विट किए। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि एक जनवरी 2004 को तत्कालीन सरकार ने एनपीएस लागू कर कर्मचारियों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया।
प्रदेश अध्यक्ष अनिल बड़ोनी ने कहा कि कर्मचारी संयुक्त मोर्चा राज्य में पुरानी पेंशन की लड़ाई मजबूती से लड़ रहा है। ये पहला मौका है, जब सरकार की कैबिनेट के सभी मंत्रियों ने पुरानी पेंशन को समर्थन दिया है। रिटायर होने के बाद जिन कर्मचारियों को एनपीएस के जरिए पेंशन मिल रही है, वे परेशान हैं। उन्हें नाममात्र पेंशन मिल रही है।
प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल ने कहा कि अभी कर्मचारी शांतिपूर्ण तरीके से सिर्फ मांग कर रहे हैं। मांग न मानी गई, तो कर्मचारी आंदोलन को मजबूर होंगे। कहा कि राज्य और केंद्र में एक ही सरकार है। इन सरकारों ने कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। पुरानी पेंशन योजना को लागू कर सरकार के पास एक और ऐतिहासिक निर्णय लेने का मौका है। प्रदेश महिला उपाध्यक्ष योगिता पन्त ने कहा कि अब पुरानी पेंशन की बहाली लागू कराने की लड़ाई निर्णायक स्तर पर पहुंचने जा रही है। विरोध जताने में देवेंद्र बिष्ट, प्रवीण भट्ट, योगिता पंत, भवान सिंह नेगी, कपिल पांडे, राजीव कुमार, रेनु डांगला, सुबोध कांडपाल, राजेन्द्र शर्मा, अशोक पंत, आलोक पांडे, अनिल जोशी, शंकर सिंह नायक, जयदीप रावत , सोहन सिंह नेगी, प्रेमचंद ध्यानी, राकेश रावत, श्रीकृष्ण उनियाल, जसपाल रावत ,नरेश भट्ट, भवान सिंह नेगी, कमलेश कुमार मिश्रा, सौरभ नौटियाल, गौरी नैथानी, महेश गिरि, श्री कृष्ण उनियाल, मुकेश बहुगुणा, संजय भाष्कर, दिवेन्द्र डोंडिया, पंकज बिष्ट, अजय रावत मौजूद रहे।















