उत्तराखंड में 84 साल के बुजुर्ग आईएएस अफसर भी सरकारी पदों पर डटे, युवाओं को खाने पड़ रहे नौकरी को धक्के, पॉवर सेक्टर में 64 साल से लेकर 84 साल वाले आईएएस अफसरों की भरमार, निगमों के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों के नाम पर सालों से किए जा रहे हैं एडजस्ट 

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उत्तराखंड में 84 साल के बुजुर्ग आईएएस अफसर भी सरकारी पदों पर डटे, युवाओं को खाने पड़ रहे नौकरी को धक्के, पॉवर सेक्टर में 64 साल से लेकर 84 साल वाले आईएएस अफसरों की भरमार, निगमों के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों के नाम पर सालों से किए जा रहे हैं एडजस्ट

देहरादून।

राज्य में युवाओं को पांच से दस हजार की नौकरी के लिए भी धक्के खाने पड़ रहे हैं, लेकिन नौकरशाह हैं जो 84 साल की उम्र में भी मैदान में डटे हैं। बाकायदा पांच साल का सेवा विस्तार देकर सरकार ने करीब 90 साल तक नौकरी की पक्की व्यवस्था कर दी है। ऐसा किसी एक दो रिटायर नौकरशाह के साथ नहीं हुआ है, बल्कि पॉवर सेक्टर में 64 से 84 साल वाले ऐसे कई नौकरशाहों की भरमार है।
यूपीसीएल, यूजेवीएनएल, पिटकुल के तीनों बोर्ड में बड़ी संख्या में स्वतंत्र निदेशक के नाम पर रिटायर आईएएस अफसरों को एडजस्ट किया गया है। इनमें सबसे अधिक उम्र 84 साल वाले जेएल बजाज हैं। वे लंबे समय से तीनों बोर्ड के स्वतंत्र निदेशक हैं। इसके अलावा 70 साल के सीएम वासुदेव, 64 साल के बीपी पांडे, 66 साल के आलोक रावत सीधे बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक हैं। तो सुभाष कुमार पहले मुख्य सचिव पद से रिटायर होकर उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष बने। यहां से भी पांच साल बाद रिटायर होकर अब विद्युत लोकपाल का जिम्मा संभालने के साथ कई कमेटियों में भी हैं। इनकी भी उम्र 66 साल को पार कर गई है। यूपीसीएल पॉवर परचेज पॉलिसी तय करने से हाल ही में एमडी निदेशकों के चयन को बनाई गई समिति के अध्यक्ष का जिम्मा भी 70 साल पार कर चुके पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे के पास रहा। अभी भी वे वित्त आयोग के अध्यक्ष अलग से हैं। इसके अलावा तमाम कमेटियों में भी हैं।
युवाओं को नहीं मिल रही नौकरी, बुजुर्ग 84 साल में भी डटे
पॉवर सेक्टर में 64 साल से लेकर 84 साल वाले आईएएस अफसरों की भरमार
निगमों के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों के नाम पर सालों से किए जा रहे हैं एडजस्ट
देहरादून। रवि बीएस नेगी
राज्य में युवाओं को पांच से दस हजार की नौकरी के लिए भी धक्के खाने पड़ रहे हैं, लेकिन नौकरशाह हैं जो 84 साल की उम्र में भी मैदान में डटे हैं। बाकायदा पांच साल का सेवा विस्तार देकर सरकार ने करीब 90 साल तक नौकरी की पक्की व्यवस्था कर दी है। ऐसा किसी एक दो रिटायर नौकरशाह के साथ नहीं हुआ है, बल्कि पॉवर सेक्टर में 64 से 84 साल वाले ऐसे कई नौकरशाहों की भरमार है।
यूपीसीएल, यूजेवीएनएल, पिटकुल के तीनों बोर्ड में बड़ी संख्या में स्वतंत्र निदेशक के नाम पर रिटायर आईएएस अफसरों को एडजस्ट किया गया है। इनमें सबसे अधिक उम्र 84 साल वाले जेएल बजाज हैं। वे लंबे समय से तीनों बोर्ड के स्वतंत्र निदेशक हैं। इसके अलावा 70 साल के सीएम वासुदेव, 64 साल के बीपी पांडे, 66 साल के आलोक रावत सीधे बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक हैं। तो सुभाष कुमार पहले मुख्य सचिव पद से रिटायर होकर उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष बने। यहां से भी पांच साल बाद रिटायर होकर अब विद्युत लोकपाल का जिम्मा संभालने के साथ कई कमेटियों में भी हैं। इनकी भी उम्र 66 साल को पार कर गई है। यूपीसीएल पॉवर परचेज पॉलिसी तय करने से हाल ही में एमडी निदेशकों के चयन को बनाई गई समिति के अध्यक्ष का जिम्मा भी 70 साल पार कर चुके पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे के पास रहा। अभी भी वे वित्त आयोग के अध्यक्ष अलग से हैं। इसके अलावा तमाम कमेटियों में भी हैं।

हर मीटिंग का मिल रहा 25 हजार, साल में लाखों का भुगतान
यूपीसीएल के निदेशकों को हर बोर्ड बैठक और ऑडिट कमेटी की बैठक में शामिल होने का प्रति बैठक 25 हजार रुपये मिलता है। ऑनलाइन शामिल होने पर भी यही भुगतान होता है। इसके साथ ही लॉकडाउन से पहले आए दिन बोर्ड और ऑडिट कमेटी की बैठकों के लिए पूरे पॉवर सेक्टर को पूरे तामझाम के साथ दिल्ली नोएडा की दौड़ लगानी पड़ती थी। क्योंकि अधिकतर स्वतंत्र निदेशक एनसीआर के आस पास ही रहते हैं। वो खर्च जोड़ दिया जाए, तो इन स्वतंत्र निदेशकों पर सालाना लाखों का खर्च बैठता है। तीनों निगमों की बोर्ड बैठक, ऑडिट कमेटी की बैठकें हर दूसरे महीने होती हैं। ऑडिट कमेटी तो एक दिन में खत्म भी नहीं होती। ऐसे में हर दिन का 25 हजार देना होता है।

हर नौकरशाह का रिटायरमेंट प्लान तैयार
उत्तराखंड में पॉवर सेक्टर ही नहीं, बल्कि हर आयोग, ट्रिब्यूनल में अध्यक्ष, आयुक्त, सदस्य के रूप में
रिटायरमेंट प्लान तैयार है। एक तरह से आयोग नौकरशाहों के पुनर्वास केंद्र बन गए हैं। यहां रिटायरमेंट के बाद नौकरशाहों को वेतन, भत्तों की सुविधा मिलती है, बल्कि वाहन समेत घर में नौकरों की फौज भी बरकरार रहती है। यही वजह है, जो सूचना आयोग, सेवा का अधिकार, मानवाधिकार आयोग समेत तमाम ट्रिब्यूनल में यही रिटायर नौकरशाह जमे हुए हैं।
मदन कौशिक, सरकारी प्रवक्ता के अनुसार ये परंपरा गलत है। पॉवर सेक्टर में एक निश्चित अवधि के बाद किसी को भी स्वतंत्र निदेशक नहीं बनाया जाना चाहिए। 80 साल के बाद तो बिल्कुल भी नहीं। भविष्य में इस तरह के प्रकरणों को गंभीरता के साथ देखा जाएगा।

हर मीटिंग का मिल रहा 25 हजार, साल में लाखों का भुगतान
यूपीसीएल के निदेशकों को हर बोर्ड बैठक और ऑडिट कमेटी की बैठक में शामिल होने का प्रति बैठक 25 हजार रुपये मिलता है। ऑनलाइन शामिल होने पर भी यही भुगतान होता है। इसके साथ ही लॉकडाउन से पहले आए दिन बोर्ड और ऑडिट कमेटी की बैठकों के लिए पूरे पॉवर सेक्टर को पूरे तामझाम के साथ दिल्ली नोएडा की दौड़ लगानी पड़ती थी। क्योंकि अधिकतर स्वतंत्र निदेशक एनसीआर के आस पास ही रहते हैं। वो खर्च जोड़ दिया जाए, तो इन स्वतंत्र निदेशकों पर सालाना लाखों का खर्च बैठता है। तीनों निगमों की बोर्ड बैठक, ऑडिट कमेटी की बैठकें हर दूसरे महीने होती हैं। ऑडिट कमेटी तो एक दिन में खत्म भी नहीं होती। ऐसे में हर दिन का 25 हजार देना होता है।

हर नौकरशाह का रिटायरमेंट प्लान तैयार
उत्तराखंड में पॉवर सेक्टर ही नहीं, बल्कि हर आयोग, ट्रिब्यूनल में अध्यक्ष, आयुक्त, सदस्य के रूप में
रिटायरमेंट प्लान तैयार है। एक तरह से आयोग नौकरशाहों के पुनर्वास केंद्र बन गए हैं। यहां रिटायरमेंट के बाद नौकरशाहों को वेतन, भत्तों की सुविधा मिलती है, बल्कि वाहन समेत घर में नौकरों की फौज भी बरकरार रहती है। यही वजह है, जो सूचना आयोग, सेवा का अधिकार, मानवाधिकार आयोग समेत तमाम ट्रिब्यूनल में यही रिटायर नौकरशाह जमे हुए हैं।

ये परंपरा गलत है। पॉवर सेक्टर में एक निश्चित अवधि के बाद किसी को भी स्वतंत्र निदेशक नहीं बनाया जाना चाहिए। 80 साल के बाद तो बिल्कुल भी नहीं। भविष्य में इस तरह के प्रकरणों को गंभीरता के साथ देखा जाएगा।
मदन कौशिक, सरकारी प्रवक्ता

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