पुरानी पेंशन बहाली को चलेगा ऑनलाइन अभियान, राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा की ऑनलाइन बैठक में आंदोलन को तेज करने पर जोर
देहरादून।
पुरानी पेंशन बहाली को लेकर राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के बैनर तले ऑनलाइन अभियान चलेगा। मोर्चा पदाधिकारियों ने नई पेंशन स्कीम को कर्मचारियों के साथ धोखा करार दिया। कहा कि नई पेंशन स्कीम को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मोर्चा की ऑनलाइन बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि पुरानी पेंशन स्कीम में वेतन की ही तरह पे कमीशन और डीए लागू होता है। वहीं एनपीएस में ये दोनों चीजें नदारद हैं। पे कमीशन हर 10 साल में पेंशन को गुणात्मक रूप से बढ़ा देता है, वहीं डीए के चलते भी कुछ प्रतिशत बढ़ोत्तरी हर छह महीने में होती है। दूसरी ओर एनपीएस में पेंशन इंश्योरेंस कंपनी से मिलनी है। वो न तो हर साल और न ही हर छह महीने में पेंशन को बढ़ाएंगे।
पुरानी पेंशन व्यवस्था का शेयर मार्केट से कोई संबंध नहीं था। पुरानी पेंशन में हर साल डीए जोड़ा जाता था। पुरानी पेंशन व्यवस्था में गारंटी थी कि कर्मचारी या अधिकारी की आखिरी सैलरी का लगभग आधा उसे पेंशन के तौर पर मिलेगा। अगर किसी की आखिरी सैलरी 50 हजार है तो उसे 25 हजार पेंशन मिलती थी। इसके अलावा हर साल मिलने वाला डीए और वेतन आयोग के तहत वृद्धि की सुविधा थी। नौकरी करने वाले व्यक्ति का जीपीएफ अकाउंट खोला जाता था। जीपीएफ एकाउंट में कर्मचारी के मूल वेतन का 10 फ़ीसदी कटौती करके जमा किया जाता था।जब वह रिटायर होता था तो उसे जीपीएफ में जमा कुल राशि का भुगतान होता था सरकार की तरफ से आजीवन पेंशन मिलती थी।
ऑनलाइन बैठक में अध्यक्ष अनिल बड़ोनी, महामंत्री सीताराम पोखरियाल, सोनिया गौरव, नीलम बिष्ट, गुरुदेव रावत, अवंतिका पोखरियाल, राजीव उनियाल, मनोज भंडारी, सरिता सेमवाल, डॉ, दिनेश चन्द्र पसबोला, अवधेश सेमवाल, नरेश कुमार भट्ट, हिमांशु जगूड़ी, डॉ. कमलेश कुमार मिश्र, रेणु डांगला, रजनी रावत, योगेश घिल्डियाल, रश्मि गौड़ मौजूद रहे।




