फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र प्रशासनिक भ्रष्टाचार, उक्रांद ने देहरादून जिले के प्रशासनिक अफसरों पर उठाए गंभीर सवाल, संरक्षक काशी सिंह ऐरी बोले शासन की नाक के नीचे देहरादून में कैसे बने फर्जी प्रमाण पत्र l

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देहरादून।

फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्रों से एमबीबीएस सीट हासिल करने पर उक्रांद ने सवाल उठाए। उक्रांद संरक्षक काशी सिंह ऐरी ने देहरादून जिले के प्रशासनिक अफसरों पर सवाल उठाए। कहा कि शासन की नाक के नीचे राजधानी में कैसे फर्जी प्रमाण पत्र बने, इसकी जांच होनी चाहिए।
काशी सिंह ऐरी ने कहा कि प्रशासनिक अफसरों की मिलीभगत से ही ये फर्जी प्रमाण पत्र बनाए गए हैं। उन्होंने इसे सीधे तौर पर उत्तराखंड के युवाओं के हितों पर डाका डालने की बड़ी प्रशासनिक साजिश करार दिया। कहा कि पहले ही उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकारों को खत्म किया जा रहा है। पहले मूल निवास खत्म कर स्थायी प्रमाण पत्र की व्यवस्था देकर राज्य गठन के मूल उद्देश्य को ही समाप्त किया गया। राज्य की नौकरियों में राज्य के मूल निवासियों के अधिकारों को ही सीमित कर दिया गया। उसके बाद राज्य के जल, जंगल, जमीन की बंदरबांट की गई।
कहा कि अब फर्जी प्रमाण पत्र बना कर राज्य की एमबीबीएस सीटों को बाहरी राज्यों को बांटने की साजिश की गई। इस पूरे घपले की विस्तृत जांच की जानी चाहिए। जो अफसर, कर्मचारी इस साजिश में शामिल हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इस मामले में नीचे से लेकर ऊपर तक हर अफसर के खिलाफ कार्रवाई हो। कहा कि राजधानी देहरादून में फर्जी प्रमाण पत्र बनना एक गंभीर विषय है। इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लिया जा सकता। क्योंकि देहरादून में प्रशासनिक और राजनीतिक नेतृत्व मौजूद है। यदि इस तरह के फर्जीवाड़े राजधानी में ही अफसरों की नाक के नीचे होंगे, तो दुरुस्थ क्षेत्रों की प्रशासनिक मशीनरी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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