उत्तराखंड भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में हरक की जगह सत्याल ने संभाला कामकाज, हरक के करीबियों का नहीं लग रहा मन 

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उत्तराखंड भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में हरक की जगह सत्याल ने संभाला कामकाज, हरक के करीबियों का नहीं लग रहा मन

देहरादून।

उत्तराखंड भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के नये अध्यक्ष के रूप में शमशेर सिंह सत्याल ने सोमवार को कार्यालय पहुंच कर विधिवत कामकाज संभाला। उनके नये अध्यक्ष के आने की सूचना को लेकर बोर्ड में खलबली मची रही। एक झटके में बोर्ड में नये निजाम की तैनाती से बोर्ड स्टाफ सकते में है। बोर्ड सचिव दमयंती रावत को छोड़ कर कैबिनेट मंत्री हरक सिंह के अन्य करीबियों ने फिलहाल बोर्ड के कामकाज से दूरी बना रखी है।
उन्होंने कार्यालय पहुंच बोर्ड के कामकाज को समझने के साथ ही पुराने कार्यों का भी हिसाब किताब लिया। लंबे समय बाद ये पहला मौका रहा, जब बोर्ड अध्यक्ष कार्यालय पहुंचे हो। इससे पहले कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत बोर्ड अध्यक्ष की भूमिका में रहे। कैबिनेट मंत्री होने के कारण उनका कार्यालय आना कम ही रहा। दूसरी ओर शमेशर सिंह सत्याल सोमवार को सुबह ठीक साढ़े दस बजे कार्यालय पहुंचे। उनके कार्यालय आने की संभावना पहले से ही कर्मचारियों को रही, इसके कारण अधिकतर स्टाफ समय पर पहुंच गया। कार्यालय पहुंचने पर पहले उनका स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने सचिव दमयंती रावत समेत अन्य स्टाफ के साथ बैठक की।
बोर्ड की ओर से श्रमिकों को लाभ पहुंचाने वाली कौन कौन सी योजनाएं संचालित हो रही हैं, उनका ब्यौरा लिया। सभी योजनाओं की जानकारी ली। किस किस योजना पर पिछले सालों में कितना बजट खर्च हुआ। श्रमिकों के पंजीकरण की संख्या क्या है, पंजीकरण की व्यवस्था क्या हैं। पंजीकरण के कार्य किस तरह संचालित किए जाते हैं। इस पर भी रिपोर्ट ली। अध्यक्ष सत्याल ने बताया कि श्रमिकों के हितों के साथ किसी भी तरह लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर सरकार की जीरो टालरेंस नीति के अनुरूप ही काम किया जाएगा।

इन सवालों का जवाब न होगा आसान
बोर्ड स्तर से पिछले कुछ सालों में करोड़ों के बजट से साइकिल, सिलाई मशीन, टूल किट खरीदे गए। इनके आवंटन की प्रक्रिया हमेशा विवादों में रही। लाभार्थियों को लेकर भी हमेशा विवाद रहा। ऐसे में बोर्ड स्तर से अभी तक हुई पुरानी खरीद और सामान के आवंटन को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना आसान न होगा।

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